"आज मौसम कितना उदास है ना?"
"नहीं तो । बल्कि आज तो मौसम और अच्छा है । देखो न कितनी अच्छी हवा चल रही है"
"नहीं । मुझे वसंत ऋतू बिलकुल भी पसंद नहीं है । कितनी उदास होती है इसकी दोपहर ।"
"अच्छा? और शामों का क्या?"
"अरे हाँ! शामें तो और अकेली लगती हैं "
"और जो फूल खिलते हैं वो? कह दो की वो भी नहीं पसंद ।"
"नहीं पसंद"
"और ये जो गिलहरी फुदक रही है वो?"
"नहीं "
"पत्तों के सरसराने की आवाज़?"
"बिलकुल भी नहीं "
"तब तो तुम्हें चिड़ियों की आवाज़ भी नहीं पसंद होगी"
"सही समझा । नहीं पसंद "
"यार तुम कैसे इंसान हो?"
"सडु"
"कोई एक चीज़ है जो तुम्हें बहुत पसंद हो ?"
"है न"
"क्या ?"
"तुम हो न "
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