Saturday, 27 February 2016

इज़हार

उस वक़्त मैंने कहाँ सोचा था की अनजाने में तुम्हारे साथ बिताया ये वक़्त , बेमन तुमसे की हुई ये बातें मुझे तुम्हारे करीब लाने का किस्मत का बहाना  है ।
मैंने कब जाना की राह चलते अचानक तुमसे टकरा जाना और उसके बाद घंटो तुमसे की हुई बातें इतनी कीमती हो जाएँगी की हर बार, बार बार, तुम्हारे और करीब होने के लिए मैं दिन में हज़ार बार उन्हें दोहराती रहूंगी ।
मुझे तो पता भी नहीं चला की कब तुम्हारे साथ वक़्त बिताने की ये आदत मेरी चाहत बन गयी ।

जाने कौन सी बात है तुममे की तुमसे दूर रहना मुझे बेचैन कर देता है । फिर जाने वो कौन सी बात है की तुम्हारे पास होकर भी मुझे चैन नहीं मिलता ।
मैं कायल हूँ तुम्हारी इस हँसी की । किसी बात पर तुम्हे दिल खोलकर हस्ते हुए देखना कितना सुखद एहसास है । दिल जीत लेने वाली तुम्हारी वो निश्छल, मंद मुस्कान तुम्हे और खूबसूरत बनती है ।

मैं परेशान हो जाती हूँ तुम्हरी सबको परेशान करने की आदत से । कई बार तुम्हारे कान खींचने का दिल करता है, की तुममे क्यों अभी भी बचपना है? तुम कब बड़े होगे ? पर सच कहूँ तो तुम्हारा ये बचपना भी मुझे पसंद है । मुझे परेशान देखकर तुम्हारा खुश होना भी मुझे ख़ुशी देता है ।

मैं जानती हूँ मैं तुमसे ये सब कह नहीं पाऊँगी । नाही तुम कभी समझ पाओगे । शायद प्यार में मिली हार ने मुझे कमज़ोर कर दिया है । मुझे डर लगता है तुम्हारे लिए अपने इन जज़्बातों से । मैं तुम्हारे लिए अपनी चाहत को और बढ़ने नहीं देना चाहती ।

किसी को यादों से निकाल पाना बहुत ही मुश्किल होता है । और खुद को एक बार फिर समेटने की हिम्मत नहीं है मुझमें । मैं तुम्हें ये कभी नहीं बताउंगी की तुमने चंद दिनों में मुझे कितनी यादें दी हैं । नहीं बताउंगी की तुम्हारी गैर-मौजूदगी मुझे किस हद तक परेशान कर देती है । तुम्हारा उदास चेहरा मुझे अंदर तक रुला देता है । तुम्हे हस्ता देखने के लिए मैं क्या कुछ कर सकती हूँ ।

तुम्हें कभी नहीं बताउंगी की मैं तुमसे किस कदर प्यार करती हूँ । मुझे टूट कर बिखर जाने से डर लगता है । 

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