Thursday, 11 February 2016

आखिरी ख़त

आज भी नींद खुलते ही सबसे पहला ख्याल तुम्हारा आता है । पता नहीं तुम समय पर जगे होगे या नहीं । तुम्हे रोज़ सुबह नींद से जगाना तो मेरा काम था । तुम्हे कॉल करने के लिए मैं खुद अलार्म लगा कर सोया करती थी । आज भी याद है मुझे, तुम कैसे नींद में कुछ भी बोला करते थे और मैं मन ही मन तुम्हारी बच्चों जैसी इस हरकत पर मुस्कुराया करती थी । कैसे मैं बार बार अपना फ़ोन देखा करती थी, के शायद तुम काम से आ गए होगे, शायद तुमने कॉल किया होगा । और कभी जो तुम्हारी कॉल मिस हो जाती थी तो खुद को कितना कोसती थी, कि क्या पता अब तुम्हे मुझसे बात करने की फुर्सत मिलेगी भी या नहीं । कहीं फिर आज तुम दोस्तों के साथ खेलने चले गए तो मुझे नींद कैसे आएगी । तुम्हे पता तो है की तुम्हारी आवाज़ सुने बिना मुझे नींद नहीं आती थी ।

तुम्हे याद है तुम कभी कभी फ़ोन पर मुझे हिस्ट्री पढ़ाया करते थे? कभी मुग़ल साम्राज्य तो कभी फंडामेंटल राइट्स, तुम्हे हिस्ट्री में कितनी दिलचस्पी थी न । मुझे हर घटना कहानी की तरह सुनाना और अंत में मुझसे कहानी का सारांश पूछना ! तुम्हारी कहानियाँ और आवाज़ सुनते सुनते कब मुझे इतिहास पसंद आने लगा पता ही नहीं चला ।

ये बारिश आज भी मुझे हमारी पहली मुलाकात की याद दिलाती है । जब तुम परेशान होकर इधर उधर मुझे ढूंढ रहे थे उस वक़्त तुम्हे अपने और करीब आते देख मेरी साँसें तेज़ हो गयी थीं । याद है तुमने मुझे गिरने से बचाया भी था ? मैंने कब जाना की तुम्हारी हर बार मुझे गिरने से बचाने की आदत मुझे लापरवाह बना देगी ।
तुम्हारी इन्ही आदतों की वजह से शायद मैं तुमसे ज़्यादा उम्मीद करने लगी थी । लगने लगा था की तुम बिना बोले मेरी दिल की बातें समझ जाओगे । तुम समझते भी थे । तभी तो मैं तुम्हारे बिना रहने का सोच भी नहीं पाती थी । तब कहाँ पता था की मेरी सोच और मेरी हकीकत  में मीलों का फैसला होगा ।

लोग कहते हैं तुमने कभी मुझसे प्यार नहीं किया । पर पता नहीं क्यों मेरा दिल ये नहीं मानता । मैं खुद को न जाने कैसे कैसे बहाने दे कर मना लेती हूँ की प्यार तो तुम भी करते थे मुझसे । तुम्हारे साथ बिताया हर पल याद है मुझे । तुम्हारा हर पल मुझे अपनी नज़रो के सामने रखना, मुझसे न हटने वाली तुम्हारी गहरी बोलती नज़रें और मुझपर जान छिड़कने वाला तुम्हारा हर वो अंदाज़ । ये सब झूठ नहीं था । मैं चाह कर भी अपने लिए तुम्हारे एहसासों को झूठा नहीं बता सकती ।

तो क्या कारण है की आज हम साथ नही हैं ?
मैंने इस सवाल का जवाब ढूँढना बंद कर दिया है । ज़रुरु मेरी ही कोई गलती रही होगी ।

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