याद आता है मुझे
बचपन का वो ज़माना
जब तुम्हे छुप छुप कर देखना ही था
मेरे जीने का बहाना
याद आता है मुझे
तुम्हारी गलियों में गुज़ारा हर वक़्त, हर लम्हा
तुम्हे बस एक बार देखने की ख़्वाहिश
फिर लौट आना युही खाली हाथ, नाउम्मीद और तन्हा
याद आता है मुझे
तुम्हे स्कूल तक छोड़ने जाना
पिछली सीट पर बैठ कर तुम्हे देखना
और तुम्हारे मुड़ते ही मेरा सेहम जाना
याद आता है मुझे
गुलाबी रंग का तुम्हारा कढ़ाईदार सूट
रेशम के धागों से बुनी तम्हारी गुलाबी चादर
जो कर रही थी मेरी कायनात को मेहफ़ूज़
याद आता है मुझे
मंदिर में घंटों तुम्हारा इंतज़ार करना
मुझे देख मुस्कुराना तुम्हारा
और तुम्हे देख मेरी धड़कनों का तेज़ हो जाना
याद आता है मुझे
तुम्हारा मोहल्ले की शादियों में जाना
मेरा तुम्हारा पीछा करना
और तुम्हारा मुझे देख कर भी अनदेखा कर जाना
याद आता है मुझे
मेरा तुम्हे इज़हार करना और तुम्हारा इंकार कर जाना
मेरा बार बार कोशिश करना
और तुम्हारा हर बार मुकर जाना
याद आता है मुझे
तुम्हारी आँखों से बरसता वो नूर
मुझे आखिरी बार पलट कर देखना तुम्हारा
और कर देना खुद से दूर
आज भी याद हो तुम
तुम्हारे दबे होंठ और झुकी नज़रों का शर्माना,
मुझसे दूर हो कर भी तुम्हारा हर वक़्त मेरे ख्यालों में होना,
और मेरे बुरे वक़्त में भी मुझे जीना सीखा जाना
बचपन का वो ज़माना
जब तुम्हे छुप छुप कर देखना ही था
मेरे जीने का बहाना
याद आता है मुझे
तुम्हारी गलियों में गुज़ारा हर वक़्त, हर लम्हा
तुम्हे बस एक बार देखने की ख़्वाहिश
फिर लौट आना युही खाली हाथ, नाउम्मीद और तन्हा
याद आता है मुझे
तुम्हे स्कूल तक छोड़ने जाना
पिछली सीट पर बैठ कर तुम्हे देखना
और तुम्हारे मुड़ते ही मेरा सेहम जाना
याद आता है मुझे
गुलाबी रंग का तुम्हारा कढ़ाईदार सूट
रेशम के धागों से बुनी तम्हारी गुलाबी चादर
जो कर रही थी मेरी कायनात को मेहफ़ूज़
याद आता है मुझे
मंदिर में घंटों तुम्हारा इंतज़ार करना
मुझे देख मुस्कुराना तुम्हारा
और तुम्हे देख मेरी धड़कनों का तेज़ हो जाना
याद आता है मुझे
तुम्हारा मोहल्ले की शादियों में जाना
मेरा तुम्हारा पीछा करना
और तुम्हारा मुझे देख कर भी अनदेखा कर जाना
याद आता है मुझे
मेरा तुम्हे इज़हार करना और तुम्हारा इंकार कर जाना
मेरा बार बार कोशिश करना
और तुम्हारा हर बार मुकर जाना
याद आता है मुझे
तुम्हारी आँखों से बरसता वो नूर
मुझे आखिरी बार पलट कर देखना तुम्हारा
और कर देना खुद से दूर
आज भी याद हो तुम
तुम्हारे दबे होंठ और झुकी नज़रों का शर्माना,
मुझसे दूर हो कर भी तुम्हारा हर वक़्त मेरे ख्यालों में होना,
और मेरे बुरे वक़्त में भी मुझे जीना सीखा जाना